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राहुल गांधी की सेना पर टिप्पणी मामले में लखनऊ कोर्ट में पेशी से गैरहाजिर रहना: जानिए पूरा विवाद

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2025 में एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी चर्चा में हैं। इस बार मामला लखनऊ की एक अदालत से जुड़ा है, जहां उन्हें भारतीय सेना पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पेश होना था। लेकिन वह पेश नहीं हुए, जिससे इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। आइए जानते हैं इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी।


मामला क्या है: राहुल गांधी की सेना पर टिप्पणी

टिप्पणी की पृष्ठभूमि

  • यह मामला राहुल गांधी द्वारा 2019 में की गई एक सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़ा है।
  • उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि “सेना को मारक मशीन कहा जाता है।”
  • इस बयान को सेना का अपमान मानते हुए कई लोगों ने आपत्ति जताई थी।

कानूनी पहलू

  • इस बयान के खिलाफ एक याचिका लखनऊ की कोर्ट में दायर की गई थी।
  • कोर्ट ने राहुल गांधी को समन भेजकर पेश होने का आदेश दिया था।

किसने दर्ज कराया केस?

  • भाजपा के पूर्व पार्षद रोहित मिश्रा ने यह आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
  • आरोप था कि बयान से देश की सशस्त्र सेनाओं की छवि धूमिल हुई है।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और कोर्ट में गैरहाजिरी

कोर्ट में पेश न होना

  • कोर्ट ने 18 जून 2025 की तारीख को राहुल गांधी को पेश होने का आदेश दिया था।
  • राहुल गांधी उस दिन कोर्ट में मौजूद नहीं हुए।

राहुल की तरफ से क्या कहा गया?

  • राहुल गांधी की ओर से वकील ने कोर्ट में पेश होकर कारण बताया कि वे अन्य व्यस्तताओं के चलते उपस्थित नहीं हो सके।
  • अगली सुनवाई की तारीख मांगी गई।

कोर्ट की प्रतिक्रिया

  • कोर्ट ने नाराजगी जताई और अंतिम मौका देने की बात कही।
  • अगली सुनवाई की तारीख अब 15 जुलाई 2025 तय की गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

भाजपा की प्रतिक्रिया

  • भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी को सेना के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
  • यह देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थान का अपमान है।

कांग्रेस का जवाब

  • कांग्रेस पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने कोई आपत्तिजनक बयान नहीं दिया।
  • इसे केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए उछाला जा रहा है।

विश्लेषण:

  • यह मामला चुनावी वर्ष में राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
  • दोनों पक्ष इस विषय को लेकर जनभावना को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

कानूनी दृष्टिकोण से केस की स्थिति

दर्ज धाराएं:

  • भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (राजद्रोह)
  • धारा 505 (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान)

सजा का प्रावधान:

  • अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा संभव है।
  • हालांकि, यह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है।

पूर्व में ऐसे केसों का परिणाम

केसव्यक्तिपरिणाम
2013असीम त्रिवेदीमाफी और केस खत्म
2017कन्हैया कुमारअभी ट्रायल लंबित
2019राहुल गांधी (Defamation)माफी दी गई

सोशल मीडिया और पब्लिक रिएक्शन

ट्विटर पर ट्रेंड

  • #RahuGandhiArmyRemark ट्रेंड करने लगा
  • Supporters vs Opposers में तीखी बहस

जनता की राय

  • कुछ लोग मानते हैं कि यह फ्री स्पीच का हिस्सा है
  • वहीं कुछ का कहना है कि कोई भी व्यक्ति सेना पर टिप्पणी नहीं कर सकता

इस केस का संभावित राजनीतिक प्रभाव

कांग्रेस के लिए चुनौतियाँ

  • यदि कोर्ट में यह मामला लंबा चला, तो 2025 के चुनावों में कांग्रेस को इसका नुकसान हो सकता है।
  • राहुल गांधी की छवि पर असर पड़ सकता है।

भाजपा के लिए अवसर

  • इसे राष्ट्रवाद के मुद्दे से जोड़कर राजनीतिक लाभ लिया जा सकता है।

मतदाताओं पर असर

  • शहरी वोटरों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है
  • युवा वर्ग जो सेना से जुड़ा है, वह नाराज हो सकता है

FAQs: यूज़र्स के सामान्य सवाल

Q1. राहुल गांधी को किस बयान के लिए कोर्ट में बुलाया गया?

A: सेना को ‘मारक मशीन’ कहे जाने वाले बयान के लिए।

Q2. केस किसने दर्ज कराया है?

A: भाजपा नेता रोहित मिश्रा ने लखनऊ कोर्ट में दर्ज कराया है।

Q3. कोर्ट में पेश क्यों नहीं हुए राहुल गांधी?

A: निजी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए वकील के माध्यम से पेशी टाली गई।

Q4. अगली सुनवाई कब है?

A: 15 जुलाई 2025 को।

Q5. क्या राहुल गांधी को जेल हो सकती है?

A: अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो IPC की धाराओं के तहत सजा संभव है।


निष्कर्ष

राहुल गांधी के सेना पर कथित बयान को लेकर चल रहा यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन चुका है। जहां भाजपा इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे फ्री स्पीच का मामला बता रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट का रुख क्या होता है और यह मामला चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करता है।


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